Trending News
दिन की शुरुआत करने से पहले राशिफल पर डालें एक नज़र | रोज सुबह खाएं 4-5 बादाम, होंगे फायदे ही फायदे | जब बुलेटिन शुरु होने से पहले आपस में ही लड़ने लगे ये एंकर्स, अब वायरल हो रहा ये मजेदार वीडियो | सुष्मिता सेन ने इस अनोखे अंदाज में दी श्रीदेवी को श्रद्धांजलि, बेटियों को लेकर कही ये बात | मोदी ने कहा – इस्लामिक विरासत पर हमें गर्व है, आतंक के खिलाफ मुहिम किसी धर्म के खिलाफ नहीं | अलविदा चांदनी… राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हुईं श्रीदेवी | ओवैसी का भड़काऊ बयान, बोले – मस्जिद जहां थी, वहीं बनेगी… नहीं छोड़ेंगे दावा | शुरू हुई 2019 के चुनाव की तैयारी, मेरठ में आरएसएस के समागम में उमड़ा स्वयंसेवकों का सैलाब | अपनी चमक बिखेर कर हमेशा के लिए चली गई ‘चाँदनी’, शोक में डूबा पूरा बॉलीवुड जगत | #INDvsSA Final T20 : भुवनेश्‍वर के कमाल से भारत ने अफ्रीका को 7 रन से रौंदा, जीती सीरीज़   | 5 रुपये के सेंधा नमक में छिपा है खूबसूरती का पिटारा, इसे इस्तेमाल करने के बाद सबकुछ भूल जाएंगी आप | … तो इसलिए शरीर के निचले हिस्सों में नहीं पहना जाता सोना |

इस गांव में इंसानों से लेकर जानवर तक सभी हैं अंधे, अभी भी पत्थरों के बिस्तर पर सोते हैं लोग

नई दिल्ली। आज तक आपने बहुत सारे शहर और गांव देखे होंगे, पूरी दुनिया में ऐसे बहुत से गांव हैं जो खुद में बहुत अजीबो-गरीब हैं। हर गांव के लोगों के रहने खान-पान, रिति-रिवाज और वहां का तापमान सभी कुछ अलग होता है। पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे गांव के बारे में जहां पर सभी लोग अंधे हैं, फिर चाहे वो स्त्री-पुरुष हों या फिर पशु-पक्षी, सभी अंधे हैं। इस गांव के पक्षी अंधेपन के कारण आसमान में उड़ नहीं पाते हैं और पेड़ों से टकरा कर ज़मीन पर गिर जाते हैं। आइए जानते है इस गांव के बारे में कुछ और बातें।

इस गांव में किसी के भी घर में खिड़की दरवाजे नहीं है

भारत में एक गांव मौजूद है, जिसका नाम है टिल्टेपक, इस गांव में जोपोटेक जाति के लोग रहते हैं इस गांव की आबादी करीब 300 है और यहाँ पर रेड इंडियन निवास करते हैं। ये लोग जन्मजात अंधे नहीं होते हैं पर जन्म लेने के कुछ समय बाद सभी को दिखाई देना बंद हो जाता है। यहां के लोग पत्थरों के बिस्तर पर सोते हैं और खाने में सेम, मक्का और मिर्च खाते हैं। इन लोगों के पास आज भी लकड़ी के बने हुए औजार हैं।

टिल्टेपक गानों में एक सड़क के किनारे लगभग 70 झोपड़ियां बनी हुई है, जिनमें यह लोग रहते हैं और आपको जानकर हैरानी होगी की किसी भी झोपड़ी में खिड़कियां और दरवाजे नहीं हैं ऐसा इसलिए क्योकि यहाँ के सभी लोग अंधे हैं और उन्हें रोशनी की जरूरत नहीं पड़ती है। इन लोगों को सुबह होने का अंदाज़ा भी पशुओं-पक्षियों की आवाज होता है, और शाम के समय ये सभी लोग एक जगह जमा होकर खाना खाते हैं और शराब पीते और नाचते नाचते गाते हैं।

एक प्रकार के किटाणु के काटने की वजह से अंधे हो जाते हैं लोग

यहां के लोगों का मानना है की इस गांव में एक लावजुएजा नाम का पेड़ मौजूद है जिसे देखने से यहाँ के लोग लोग अंधे हो जाते है। पर इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है, क्योकि जो टूरिस्ट यहाँ आते हैं वो इस पेड़ को देखकर अंधे नहीं होते। वैज्ञानिकों ने बताया है की यहाँ के लोगो के अंधे होने का कारण एक प्रकार का किटाणु होता है जो एक काली मक्खी के काटने से किटाणु शरीर में फैल जाता है, जिसके कारण आंखों की नसें काम करना बंद कर देती है और व्यक्ति जल्दी अंधा हो जाता है।

loading...

Related Posts